विधु-वधु प्रथम हास भृकुटि-विलास चन्द्र-हृदय पर छा गई अम्बर के आँगन में देखो विधु-वधु वह आ गई। बरसाती बादल से धुलकर चन्दन का उबटन मल...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें