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विधु-वधु प्रथम हास भृकुटि-विलास चन्द्र-हृदय पर छा गई अम्बर के आँगन में देखो विधु-वधु वह आ गई। बरसाती बादल से धुलकर चन्दन का उबटन मल...
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जटाजूटधारी का आज धाराधर करते अभिषेक गर्जन के मंत्रोच्चारण से ढुलकाते हैं जल अविवेक दिनकर की दीप्ति से दीप्त सजा धनुष नभ-प्रांगण में स...
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हे स्रोतस्विनी! अब बह जाओ तुम्हें बहना है तो कोई और तह लाओ बलात् रोकूं कब तक तुमको हे सरस शीतल सलिला तुम ठहर गई हो तो हो गई हो पं...
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संध्या की संधि में साधे साधक बनकर कितने गीत नाम रखकर सांध्यगीत बोलो क्या काम किया अलीक? अरविन्द सांध्यगीत संपर्क सूत्र:-8696279384

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